मंगलवार, 11 नवंबर 2008

अद्भुत

अद्भुत है संसार

अद्भुत इसकी माया

जिसने जितना खोया

उसने उतना पाया

डूबोगे तुम जितना

उतना ही पाओगे

गर रहे किनारे खड़े

तो हाथ मलते रह जाओगे

असत्य से जीत

पास आती जायेगी

मगर रहे ध्यान यह

सत्य सा अमर ना हो पायेगी

जुदाई से बढती मोहब्बत

मोहब्बत बड़ी बेईमान

मोहब्बत बड़ा खुदा से

पर होता इससे कमजोर इंसान

रवि प्रकाश केशरी

वाराणसी

1 टिप्पणी:

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

जिसने जितना खोया

उसने उतना पाया

डूबोगे तुम जितना

उतना ही पाओगे
बढिया रचना है।बधाई।