बुधवार, 19 नवंबर 2008

jindagi

जिंदगी

बंद दरवाजे हों
या खुली खिड़किया
हर समय बढ़ती है
जिंदगी से नजदीकिया

हो के बेवफा
वफ़ा का दम भरती है
गुमनाम गलियों में रहकर
हमेशा मशहूर रहती है

सब जानते है साथ
छोड़ देगी एक दिन
फ़िर भी वादा करती है
हर पल हर दिन

कभी आम है
कभी खास है जिंदगी
कड़वे अनुभवों की
मिठास है जिंदगी

आज है कल
नही रहेगी जिंदगी
फिर भी बातों में
जिन्दा रहेगी जिंदगी

एक हमसफ़र है
राहे गुजर है जिंदगी
खुदा से खुबसूरत
अहसास है जिंदगी !

रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

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