सोमवार, 25 मई 2009

तकलीफ

बस इतनी सी तकलीफ
मेरे दिल में मौजूद है
मेरे दिल तोड़ने वाला शख्स का
मेरे दिल में वजूद है !

अब तन्हाइयों बिना
जीने से डर लगता है
हर चेहरे में उसका बस
बस उसका अक्स दिखताहै !

खामोश लब झुकी निगाहें
इस बात का करती बयां है
बिना उसके मेरे लिए
क्या जमीं क्या आसमा !


-रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

गुरुवार, 7 मई 2009

चुनाव पर्व

पांच साल में एक बार
आता यह त्यौहार
जनता के आगे हाथ जोड़ते
सत्ता के ठेकेदार !


सत्ता के ठेकेदार
मिलजुलकर कर बतियाते है
गर गलती से जीत गए
तो मिलकर सब चट कर जाते है !


कहे केशरी इन लोगो की
कोई नही जमात
सत्ता में आते ही मारे
जनता को दो लात !

- रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी