अच्छा है जो तू मुझे याद नही करता
मेरे लिए वक्त बर्बाद नही करता
शुक्र है जो तू ख़ुद में मशगुल है
तेरे लिए मुझे यह गम भी कबूल है !
कौन कहता है की
शमा जलाने से रोशनी होती है
मैने दिल को जलाया
पर अँधेरा कायम रहा !
शनिवार, 27 सितंबर 2008
रविवार, 14 सितंबर 2008
duriya
दूरियाँ
दूरिया छोटी
फासले बड़े हो गए
वास्तव में हम
बड़े हो गए,
घट गई देह से
देह की दूरी
दिलो के रिश्ते
दूर हो गए,
आसमान की
खवाहिश में हम
अरमानो के लाशो
पर खड़े हो गए,
जिंदगी की
चाहत में हम
मौत के करीब
होते हो गए,
आधुनिकता के दौर में
सभ्यता हार गई
और हम
फिर नग्न हो गए,
वास्तव में हम बड़े हो गये !
रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी
दूरिया छोटी
फासले बड़े हो गए
वास्तव में हम
बड़े हो गए,
घट गई देह से
देह की दूरी
दिलो के रिश्ते
दूर हो गए,
आसमान की
खवाहिश में हम
अरमानो के लाशो
पर खड़े हो गए,
जिंदगी की
चाहत में हम
मौत के करीब
होते हो गए,
आधुनिकता के दौर में
सभ्यता हार गई
और हम
फिर नग्न हो गए,
वास्तव में हम बड़े हो गये !
रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी
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