बुधवार, 21 जनवरी 2009

गणतंत्र

ले हाथों में ध्वज तिरंगा
झूम झूम कर गायें
नित उत्कर्ष हो भारत का
मिलकर हम दुहरायें !


वीर शहीदों ने अपने
प्राणों की बाजी लगायी
भारतमाता ने कष्टों से
तब जाकर आजादी पाई !

संकल्प ले आज हम
भारत की शान बढायेंगे
भेदभाव को दूर भगाकर
प्रेमगीत को गायेंगे !

स्वतंत्र भारत में रहे
सदा सफल गणतंत्र
मन वचन कर्म से
सफल बने यह तंत्र !


-रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

मंगलवार, 13 जनवरी 2009

दशा

गहन तिमिर है
नील गगन में
सूरज का कुछ पता नहीं
मंजिल ख़ुद ही ढूंढ़ रही है
राहों का कुछ पता नहीं !

सागर सी विस्तृत आशाएं
नया धरातल खोज रही है
मीठे जल के ढेरों उदगम
प्यासे का पता पूछ रही है !

मन है विचलित
तन अकुलाये
भ्रमित हो रही दृष्टी है
नव निर्माणित सपनों पर
होती ओलावृष्टि है !

तनिक नहीं आराम जिया में
हर पल घबराया रहता है
अपनों में बेगानों को प्
हर दम पगलाया रहता है !

- रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

रविवार, 11 जनवरी 2009

चुन्नू चला स्कूल

नटखट गोलमटोल सा
लिए हाथ में रुल
पीठ पर लादे छोटा बस्ता
चुन्नू चला स्कूल!

एक हाथ में थर्मस थामे
दूजे में लिए टाफी
ब्रेड जैम बिस्किट टिफिन में
चुन्नू के लिए काफी!

दिन भर बिता स्कूल में
होती रही बस मस्ती
घर लौटे चुन्नू को देख
मम्मी उसकी हँसती!


-रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

शनिवार, 3 जनवरी 2009

पतंग

पतंग

ठुम्मक ठुम्मक
चले हवा में
मेरी लाली लाल
पतंग


सतरंगे डोरे से
बांधी
आसमान में
नाचे पतंग


फर फर उड़ती
तितली जैसी
इठलाये बलखाये
पतंग


मन की खुशियाँ
नभ से ऊँची
उम्मीदों की
सोच पतंग


रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी