बुधवार, 7 अप्रैल 2010

मंदिर मस्जिद

मंदिर के मुंडेर पर फ़ॉन्ट का आकार
बैठा एक कबूतर
ताड़ रहा था सामने
मस्जिद की छत को

मंदिर से मस्जिद की
दूरी थी दस कदम
एक तो सूरज की तपिश
ऊपर से बाजू भी बेदम

इन हालातो में कुछ यूँ हुआ
सामने से नन्हे फरीद ने
मंदिर की छत की ओर कदम बढाये
और कबूतर को हाथो में लिया

नन्हे फरीद ने धर्म की दीवार को
मानवता से तोड़ दिया
और कबूतर पर पास
कमंडल को उड़ेल दिया










सोमवार, 5 अप्रैल 2010

चेहरा

कुछ चेहरे है खिले हुए
कुछ चेहरे है लघु उदास
हर चेहरा एक राज छुपाये
हर चेहरा बनता है हर चेहरा खास

कभी बच्चे सी चंचलता
कभी सिंह सा क्रोध लिए
गौर से देखो हर चेहरे को
जो जीवन का सन्देश लिए

पल में हँसता पल में रोता
हर चेहरा अलबेला है
दिल को देखो चेहरा छोडो
इसमें बड़ा झमेला है

-रवि प्रकाश केशरी