बुधवार, 7 अप्रैल 2010

मंदिर मस्जिद

मंदिर के मुंडेर पर फ़ॉन्ट का आकार
बैठा एक कबूतर
ताड़ रहा था सामने
मस्जिद की छत को

मंदिर से मस्जिद की
दूरी थी दस कदम
एक तो सूरज की तपिश
ऊपर से बाजू भी बेदम

इन हालातो में कुछ यूँ हुआ
सामने से नन्हे फरीद ने
मंदिर की छत की ओर कदम बढाये
और कबूतर को हाथो में लिया

नन्हे फरीद ने धर्म की दीवार को
मानवता से तोड़ दिया
और कबूतर पर पास
कमंडल को उड़ेल दिया










1 टिप्पणी:

संजय भास्‍कर ने कहा…

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।