
बैठा एक कबूतर
ताड़ रहा था सामने
मस्जिद की छत को
मंदिर से मस्जिद की
दूरी थी दस कदम
एक तो सूरज की तपिश
ऊपर से बाजू भी बेदम
इन हालातो में कुछ यूँ हुआ
सामने से नन्हे फरीद ने
मंदिर की छत की ओर कदम बढाये
और कबूतर को हाथो में लिया
नन्हे फरीद ने धर्म की दीवार को
मानवता से तोड़ दिया
और कबूतर पर पास
कमंडल को उड़ेल दिया