बुधवार, 21 जनवरी 2009

गणतंत्र

ले हाथों में ध्वज तिरंगा
झूम झूम कर गायें
नित उत्कर्ष हो भारत का
मिलकर हम दुहरायें !


वीर शहीदों ने अपने
प्राणों की बाजी लगायी
भारतमाता ने कष्टों से
तब जाकर आजादी पाई !

संकल्प ले आज हम
भारत की शान बढायेंगे
भेदभाव को दूर भगाकर
प्रेमगीत को गायेंगे !

स्वतंत्र भारत में रहे
सदा सफल गणतंत्र
मन वचन कर्म से
सफल बने यह तंत्र !


-रवि प्रकाश केशरी
वाराणसी

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